सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पद्मश्री समारोह

जनवरी २०१७ में भारत के राष्ट्रपति ने कोहली जी को पद्मश्री से सम्मानित किया।

 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कृष्ण आ गया है

वसुदेव उपन्यास का एक अंश: 'कृष्ण आ गया है' 'वसुदेव' उपन्यास  यहाँ उपलब्ध है । देवकी चौंक कर उठ बैठीं। वसुदेव अपनी नींद पूरी कर चुके थे, किंतु अभी लेटे ही हुए थे। उन्हें देवकी का इस प्रकार चिहुँक कर उठ बैठना कुछ विचित्र-सा लगा। ''क्या हुआ?'' ''कृष्ण कहाँ गया?'' वसुदेव ने अपनी आँखें पूरी तरह विस्फारित कीं, ''कृष्ण? कृष्ण हमारे पास था ही कब?'' ''वह यहीं तो था मेरे पास...।'' और वे रुक गईं, ''तो मैंने स्वप्न देखा था क्या?'' ''क्या देखा था?'' वसुदेव ने पूछा।  ''पर नहीं! वह सपना नहीं हो सकता।'' देवकी ने कहा, ''वह यहीं था, मेरे पास। मेरी नासिका में अभी तक उसकी वैजयंती माला के पुष्पों की गंध है। मेरे कानों में उसकी बाँसुरी के स्वर हैं। उसने छुआ भी था मुझे!...''  ''तो तुम्हारा कृष्ण वंशी बजाता है?'' वसुदेव हँस पड़े, ''तुम्हें किसने बताया कि वह वंशी बजाता है? यादवों का राजकुमार वंशी बजाता है। वह ग्वाला है या चरवाहा कि वंशी बजाता

नरेन्द्र कोहली के रामकथा संबंधी उपन्यास

 आधुनिक युग में नरेन्द्र कोहली ने साहित्य में आस्थावादी मूल्यों को स्वर दिया था। सन् १९७५ में उनके रामकथा पर आधारित उपन्यास 'दीक्षा' के प्रकाशन से हिंदी साहित्य में 'सांस्कृतिक पुनर्जागरण का युग' प्रारंभ हुआ जिसे हिन्दी साहित्य में 'नरेन्द्र कोहली युग' का नाम देने का प्रस्ताव भी जोर पकड़ता जा रहा है। तात्कालिक अन्धकार, निराशा, भ्रष्टाचार एवं मूल्यहीनता के युग में नरेन्द्र कोहली ने ऐसा कालजयी पात्र चुना जो भारतीय मनीषा के रोम-रोम में स्पंदित था। महाकाव्य का ज़माना बीत चुका था, साहित्य के 'कथा' तत्त्व का संवाहक अब पद्य नहीं, गद्य बन चुका था। अत्याधिक रूढ़ हो चुकी रामकथा को युवा कोहली ने अपनी कालजयी प्रतिभा के बल पर जिस प्रकार उपन्यास के रूप में अवतरित किया, वह तो अब हिन्दी साहित्य के इतिहास का एक स्वर्णिम पृष्ठ बन चुका है। युगों युगों के अन्धकार को चीरकर उन्होंने भगवान राम की कथा को भक्तिकाल की भावुकता से निकाल कर आधुनिक यथार्थ की जमीन पर खड़ा कर दिया. साहित्यिक एवम पाठक वर्ग चमत्कृत ही नहीं, अभिभूत हो गया। किस प्रकार एक उपेक्षित और निर्वासित राजकुमार अपने

नरेन्द्र कोहली के महाभारत संबंधी उपन्यास

महासमर कालजयी कथाकार एवं मनीषी डॉ॰ नरेन्द्र कोहली का सर्वाधिक प्रसिद्ध महाकाव्यात्मक उपन्यास. हिन्दी साहित्य की सर्वप्रसिद्ध रचनाओं में अग्रगण्य. महाभारत पर आधारित कथानक. आधुनिक जीवनदृष्टि. चार हज़ार पृष्ठों का फैलाव. आठ खंड. आधुनिक हिन्दी साहित्य की सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपलब्धि. 'महाभारत' एक विराट कृति है, जो भारतीय जीवन, चिंतन, दर्शन तथा व्यवहार को मूर्तिमंत रूप में प्रस्तुत करती है। नरेन्द्र कोहली ने इस कृति को अपने युग में पूर्णत: जीवंत कर दिया है। उन्होंने अपने इस उपन्यास में जीवन को उसकी संपूर्ण विराटता के साथ अत्यंत मौलिक ढंग से प्रस्तुत किया है। जीवन के वास्तविक रूप से संबंधित प्रश्नों का समाधान वे अनुभूति और तर्क के आधार पर देते हैं। इस कृति में आप महाभारत पढ़ने बैठेंगे और अपना जीवन पढ़ कर उठेंगे। युधिष्ठिर, कृष्ण, कुंती, द्रौपदी, बलराम, अर्जुन, भीम तथा कर्ण आदि चरित्रों को अत्यंत नवीन रूप में देखेंगे। नरेन्द्र कोहली की मान्यता है कि वही उन चरित्रों का महाभारत में चित्रित वास्तविक स्वरूप है।